दाँत का दर्द

गरीबों का दर्द से भी भयानक।

गरीब दर्द में ही आवाज़ उठा सकते हैं,

लेकिन अगर दाँत में दर्द हो

तो अमीर भी चुप रहे जाते हैं। 


जब दर्द होता है,

तब ही दर्द महसूस होता है।

पहले नहीं।

जब आवाज़ उठती है,

तब उत्पीड़न महसूस होता है।

पहले नहीं।


दर्द करना और दर्द देना,

दोनों हीं उत्पीड़न हैं,

लेकिन ढंग अलग!