अगर खुद को दुःख नहीं मिले,
तो कैसे समझेंगे दूसरे का दुःख।
सुख ख़रीद लेता है इंसान को,
वह बिलकुल भूल जाता है अपने आपको
और छीन लेता है पड़ोसी का सुख।
सुख और दुःख एक सिक्का का हेड और टेल हैं।
हेड का मतलब-
सुखी इंसान अपना सिर को ऊंचा रखता है।
टेल का मतलब-
दुखी इंसान अपना अस्तित्व ढूँढता है पीछे।
हमेशा सुखी और हमेशा दुखी कोई नहीं रहता है।
दूसरे का दुःख में मज़ा मत लो।
दूसरे का सुख में निराश मत होना।
सिर्फ वक्त का इंतज़ार में रहो।
वक्त सिखाता है सही और गलत।

