तंहाई दिल पर छाने लगी है
हवा भी जिस्म को जलाने लगी है।
इंतजार करते-करते बीत जाती है
हर रात बेआराम जाने लगी है।
समंदर-ए-इश्क मे जब से डूबे है
खुशियां सारी ठिकाने लगी है।
उस पर क्या हक मेरा, अब तो
उसकी यादे भी आंख दिखाने लगी है।
एक शख्स ने क्या नकारा 'नेमत'
सारी दुनिया हँसी उडाने लगी है।