सिद्धांतों की बेला कहीं गुम हो गयी,
ये राजनीति एक तवायफ हो गयी!!
सच तो एक ख्वाब की बात हो गयी,
झूठो को झूठो से शिकायत हो गयी!!
जिगरी यारी तो जंगलों मे खो गयी,
अपने बदलना ये तो आदत हो गयी!!
बुजुर्गों को भी जवानी छा गयी तब,
संसद पहलवानी का अखाडा हो गयी!!
फिजा बिगाडने को नही जरूरी जालिम,
ये जरूरत तो शाहो से ही पूरी हो गयी!!