सर्द तूफानी मौसम मे पेडो से,
टूटकर गिरे पत्तो का जिक्र कहाँ है!
चौतरफा सितारो से घिरे चाँद को,
टूटकर गिरते इक तारे की फिक्र कहाँ है!!
सुगंध फैलाती उस गुलाब की महक मे,
भटकते भंवरे के हिज्र का जिक्र कहाँ है!
अपनी धुन मे नाचती समंदर की लहरो को,
किनारे बसे किसी मकान की फिक्र कहाँ है!!