रूह मे बसी है बस इक जान वही, जिसका असल जिंदगी से आज कल कोई वास्ता नहीं ! फासले बढे - बढे से है, रूसवाई अपने चरम पर है मगर दिल मे आज भी तिरे लिए कोई ख्याल बुरा नहीं !! आंखें ही तरस गयी है निहारने के लिए इक बार, दिल का क्या है ये तो तिरे बिन धडका ही नही! इक रोज तुझको छूकर गुजर जाना है, जिंदगी मे अब ठहर जाने का कोई इरादा नहीं!! कल तक सब कुछ जो तुम मेरी थी, अाज राही हूँ हर राह का कोई मंजिल मेरा ठिकाना नहीं!!