अदावतो का एक सूरज ढल भी सकता था
फासलो का समाधान निकल भी सकता था!!
हाथ तूने मेरी तरफा बढाया तो होता
मै कांटों पर हंसकर चल भी सकता था!!
तू वक्त मे खोता गया, दूर और दूर होता गया
गर् इश्क था, तू फैसले बदल भी सकता था!!
आरजू-ए-इश्क रही नही तेरे बाद, गर् होती तो
मुहब्बत का इश्तिहार निकल भी सकता था!!
दिलो का कोई और बाजार भी सज सकता था
'नेमत' चिट्ठियों का बस्ता जल भी सकता था!!