मोहब्बत तो पूरी थी मगर कोशिश अधूरी थी
सबब ये भी था जो तेरे मेरे दरमियाँ दूरी थी!!
दिल मे उभरकर दिल मे ही सिमटकर रह गयी
ये जो चाहत थी लबो पर आनी भी जरूरी थी!!
दूर से निहारना अंदाज तो बेइंतहा खूबसूरत था
मगर हाथो मे हाथ आने को गुफ्तगू भी जरूरी थी!!
मै जो ख्वाब तेरे खातिर अकेले बुनता रहता था
उनकी हकीकत को इक शर्मीली मुस्कान भी जरूरी थी!!
चंद लम्हे थोडी यादे ये कहानी और आंखो मे पानी
तेरी मेरी दास्ताँ जो है ये इतनी ही पूरी थी!!