जनाजे मेरी रूह के रोज उठते है रोज मेरे ख्वाब टूटकर गिरते है!! हर दिन नया आशियाना बनता है हर रोज ये ख्याल संवरते है!! नामुमकिन कुछ भी नही होता है यहां काली रात मे भी कुछेक जुगनू चमकते है!! तिजारत की इस बेरहम दुनिया मे, हम मुफलिस लोग सांसो को तरसते है!! वो बडे लोग हमारी सदा क्या सुनेंगे जो लोग सच सुनने से डरते है!! कहो उतना जितना निभाना मुनासिब हो वायदे पूरा करने के वायदे तो सब करते है!! जरा सी मुश्किलो से ये धागे टूट जाते है 'नेमत' ये लोग क्या खाक इश्क करते है!!