मेरे हर गुनाह मे शरीक रहता है
वो हर मर्ज का तबीब रहता है
फरिश्ता तो नही है मगर
मुसीबत और मेरे दरमियाँ बनके लकीर रहता है।
घर से बाहर वो मेरा परिवार रहता है
मुश्किलो मे कुछ नही कहता बस साथ रहता है
लाख हालात बदले लाख इंसान बदले
हर दफा मेरे खातिर पत्थर की बरसात सहता है!!