जिंदगी सफीना पर सवार करके देखते है
आज उन पर जाँनिसार करके देखते है!!
वस्ल या फिराक ये तो बाद की बात है
पहले मोहब्बत का इजहार करके देखते है!!
थिरक रहे है खुशमिजाज लोग जाम हाथ मे लेकर
गर् नशा अच्छा है तो उनकी आंखों से करके देखते है!!
यूं तो चांद के इंतजार मे आंखे बिछाये हम भी होते है
नेमत क्यूं ना आज चांद को मुन्तजिर करके देखते है!!
हूर भी शरमा रही है आज उसका रूप देखकर
चलो आज शबनम को लबो से स्पर्श करके देखते है!!
वो नजरे ये अदाएं किसी कातिल से तो कम नही ‘नेमत’ चल सांसे एक कातिल के हवाले करके देखते है!!