आया सामने जब वो शख्स,
चाँद भी पानी -पानी हो गया!
देखा बिखरते जब अपने गुरूर को,
वो चाँद कही बादलो मे खो गया!
निहार कर उसको, चंद पलो मे
चाँद अपनी शीतलता से हाथ धो गया!
यूँ नूर से लबरेज था वो,
कोहिनूर भी कुछ धुंधला हो गया!
पाकर झलक उस फूल की,
इक भँवरा तो पागल हो गया!