हम जिनके है वो हमारे नही दिल अपना है, अपने सहारे नही!! वापिस जमीं पर लौटे तो कैसे वो चश्म समंदर है, किनारे नही!! जमीं पर जन्नत से जो इत्तेफाक रखते नही उन्होंने चाँद फकत देखे है, निहारे नही!! बिखरे-बिखरे क्या कातिल लगते है इल्तिजा है की आप जुल्फ सवारें नही!! तजुर्बे इश्क के इतने भी खारे नही तुमसे हारे है हम दुनिया से हारे नही!!