अजब दुनिया है ये सारी,
कथनी-करनी मे अंतर भारी!
इबादत करते इश्क़ की,
दिलो मे नफ़रत की आग जारी!!
लबो पर मित्रता झलकती,
जेहन मे शत्रु भाव भारी!
सामने दुआ सलाम,
पीछे गालियों का दौर जारी!!
आम से खास तक,
सभी इस कुंठित सोच के प्रहरी!
अदावत सिमटी संसद तक,
दिल्लगी दोनो की गुपचुप जारी!!
मर्यादा गिरी इस कदर,
वार्ता मे भी तू तू - मै मै जारी!
जो कहे सत्य,
उस पर सरकारी फास बड़ी भारी!!