वाकिफ नहीं हूं मैं प्यार से
फिर भी ये प्यार सा लगता है
तुझे देखना ही अब मुझे संसार सा लगता है। तुझे छेड़ना, तुझे डांटना और
फिर गले से लगाना,
बातों- बातों में फिर तेरी आँखो में खो जाना
राहों को छोड़कर अब तुझे
अपनी मंजिल बनाना ही ख्वाब सा लगता है
तुझे देखना ही अब मुझे संसार सा लगता है।।
मासूम है तू बचपन सी
तेरा रूठना भी प्यार है
तू लहर नहीं सागर है
जो बहने को तैयार है
तेरे साथ ये ज़िंदगी
एक हसीन लम्हा सा लगता है
तुझे देखना ही अब मुझे संसार सा लगता है।।।
तुझे छोड़ दूं ये मुमकिन नहीं
तेरे बाद मरने से भी एतराज है
तू मेरी धड़कन ना सही
पर मेरे दिल पर तेरा ही राज है
संग तेरे चलना ही अब
खुशियों का आगाज सा लगता है
तुझे देखना ही अब मुझे संसार सा लगता है।।।।


