माँ तेरे होने पर गुमान है मुझे
तेरे कदमों में मिला जहान है मुझे
तेरे नाम से ही मिली पहचान मुझे।
तू है तो मेरा वजूद है
बाकी सब तो फिजूल है
तू सिलसिला है मेरी खुशियों का
तू माफीनामा है मेरी नादानियों का।
मेरे जन्म पर कैसे तूने पीड़ा सही
मेरी एक मुस्कान पर कैसे सब भूल गई।
ये माँ ही कर सकती है कोई और नहीं
मां जैसा इस धरती पर कोई हृदय नहीं।
दुनिया की बुरी नज़र से बचाते देखा है उसे
बच्चों के लिए अपने सपने कुर्बान करते देखा है उसे
अपनी मां के दुखों का कभी कारण न बनो
मां की आंख में आंसू की कभी वजह न बनो।
पत्थर की मूरत में भगवान नहीं हुआ करते
माँ के जज़्बात कभी कम नहीं हुआ करते
चले जाने के बाद तो दुनिया अफसोस करती है
वो मूर्ख हैं जो समझने में देर कर देते हैं।
दुनिया में तमाम बनावटी रिश्ते देखे
एक माँ ही है जिसके एहसास कभी न बदलते देखे।।


