जब से तुम मेरे सामने आई,

तब से मेरे दिल मे तुम हो 'शायद'.


तुम्हारा युं मुस्कुराना और मुस्कुराके जुल्फ़े सेहलाना,

ये देख के मुजे दुसरा कोइ पसन्द ना आये 'शायद'.


शुरुआत मे ये दिल को बहोत रोकना चाहा,

पर तुम्हे देख के ये दिल पागल हो चुका था 'शायद'.


कभी हिम्मत नही हुई युं तुम्हारे सामने आने की,

ये सोच कर के तुम किसी ओर की नहीं होगी 'शायद'.


जब तुम्हे सब कुछ बताना चाहा,

तो ये बात खुदा को पसन्द नहीं आई 'शायद'.


जब तक मे तुम्हारे करीब पहोचता,

तब तक तुम अपने दिल को किसी ओर को दे बेठी 'शायद'.


काश मे थोडा जल्दी करता,

तो तुम्हरे दिल के करीब मे होता 'शायद'.


खुदा करे कोइ एक ओर मौका दे तुमसे मिलने का,

नहीं तो युं तुम्हारी यादो के साथ जिन्दगी बिता देगे 'शायद'.


-सौरवकुमार दुबे