सफलता,

तुम कैसी हो?

हम तुमसे मिलने आए है…..


अपने पीछे हम सब

एक बसा संसार छोड़ कर आए है.

हर बंधन, हर एक दीवार तोड़ कर आए है..

जो लोग वहाँ पर हमसे,

बहुत मोहब्बत करते है

उन सब कि साँसों को

थोड़ा बेजान छोड़ कर आए है

सफलता, तुम कैसी हो?

हम तुमसे मिलने आए है……….


डर लगता है,

गर नहीं मिली तुम

तो अपना क्या होगा!

बाहरी संतोष दिखा दूंगा,

पर अंतर्मन का क्या होगा?

ऐसे कई सवाल

जो मन में पल-पल रिसते है,

सबको

बेजवाब छोड़ कर आए है…

सफलता, तुम कैसी हो..?

हम तुम से मिलने आए है


फिर सोचा,

जब मै तुमको पा लूँगा

कितना संतोष मुझे होगा!

कुछ और लक्ष्य न बना लूँगा?

क्या तुम एक मृगतृष्णा हो?

जो मुझे रिझाती जाओगी

जब-जब तुमको पा लूँगा

तुम और दूर हो जाओगी

या शायद…..ऐसा है

तुम बस मुझे चलाने आई हो

ज़िन्दगी को ज़िन्दगी बनाने आई हो

यही मानकर, यही समझ कर

हम अपनी एक कहानी को

बेअंजाम छोड़ कर आए है

सफलता,तुम कैसी हो?

हम तुम से मिलने आए है।