हसरत 


ज़िन्दगी मे ज़िन्दगी से चाहत कितनी बदल गयी

लेकिन ज़िंदा रहने की आहट अब भी वैसी है



इंसान की इंसान से सोहबत अब भी वैसी है 

दुनिया कितनी बदल गयी,मोहब्बत अब भी वैसी है 


तौर -ए -इज़हार-ए -इश्क़ बदल गया, मन्नत अब भी वैसी है

माशूक़ के पहलु में वो जन्नत अब भी वैसी है



कितने हाकिम बदल गए, चाहत अब भी वैसी है 

कितने ज़ालिम बदल गए, ज़ुल्मत अब भी वैसी है


क्या से क्या हुआ इस्लाम, शरीयत अब भी वैसी है 

राम आए अपने धाम, फुर्क़त अब भी वैसी है



जम्हूरियत के  इतने  रंग, क़िस्मत अब भी वैसी है

 इंसानियत के  इतने  ढंग, ज़िल्लत अब भी वैसी है



दुनिया बिलकुल वैसी है, जैसी उसको होनी है 

लेकिन कुछ बदलाव की हसरत अब भी वैसी है……..