ख़ामोश हूँ इसका मतलब ये नही की बेज़ुबान हूँ में,
सिसकियाँ मुझे भी सुनाई देती हैं,
लाचार बेबस मुझे भी दिखाई देती है,
देखता हूँ तुम यूँही कब तक ज़ुल्म ढाओगे,
आँख़ो पे काली पट्टी पहन हमें नचाओगे,
देखना तुम एक दिन ,
खुद में ही चकना-चूर हो जाओगे
और खुद में ही मिल जाओगे ।
स्वरचित ~सौरव कुमार झा

