पिता की नज़रों के सामने रहना,इससे महफूज़ कोई जगह नहीं…माँ नज़रों के सामने रहे,तो हमारी ख़्वाहिशों की कोई शह नहीं…सौरभ तिवारी
पिता की नज़रों के सामने रहना,इससे महफूज़ कोई जगह नहीं…
माँ नज़रों के सामने रहे,तो हमारी ख़्वाहिशों की कोई शह नहीं…
सौरभ तिवारी