तृष्णा भी मैं, कृष्णा भी मैं ,
मैं काममय, मैं राममय।
असहिष्णु भी मैं, विष्णु भी मैं ,
मैं आसुरीय , मैं ईश्वरीय ।
मैं मुक्त हूं, आसक्त भी,
मैं निंदनीय , मैं वंदनीय।
मैं काल हूं, महाकाल भी,
मैं दंभमय, मैं भक्तिमय।
मैं व्यक्त हूं, निशब्द भी ,
मैं कटुभाषीय,मैं काव्यमय।
सौरभ तिवारी
