उसकी पलकों में सिमट गयी है ज़िन्दगी,
खुल जाए, तो कई राज़ बिखर जायेंगे...
उसकी ज़ुल्फ़ों में जो मकान है, वो मेरा है..
झटक दें, तो हम बेघर हो जायेंगे..
उसके चेहरे के नूर से रोशन है समां,
हुए उदास तो, आशियाने उजड़ जायेंगे
गुलाब की पंखुड़ियों में उंगलिया फेरते रहे
रुक जाएँ, तो लब मेरा नाम गुनगुनायेंगे..
हिमाकत की थी कि जी भर के देख लूँ
उसने कहा रुक जाओ, वर्ना हम निखर जायेंगे
आइना सामने था मगर उसने बदल दिया,
ये न समझना कि चेहरे बदल जायेंगे
इस गफलत में ही गुज़ार दी ज़िन्दगी
कांच के ढेर में देखो तो हम नज़र आएंगे
महकते है हम, अब उसकी खुशबू से,
इश्क़ है, और शाबिद इत्र कहा से लाएंगे
तेरी बातों की रवानी से चलती है धड़कन,
दरिया है, तुम न हो तो डूब जायेंगे
हम आफ़्ताब है, तुमको रखेंगे रोशन सदा
डूब गए तो भी क्या, शफ़क़ छोड़ जायेंगे
ज़माने की आंधियां झकझोड़ भी दें तो क्या
तेरा साया है, हम क्या साथ छोड़ जायेंगे ...


