दो दिन की ज़िन्दगी, करीब आने में गुज़ार दी
अब जीना है मुझे, एक और ज़िन्दगी दे-दे
वस्ल की रात को गुज़र जाने की उजलत थी
तेरी बाहों में हूँ अभी, थोड़ा और वक़्त दे-दे
अच्छा नहीं लगता तेरा हाथ छोड़ जाना
थोड़ी देर रुक कर मुझे अपना हाथ दे-दे
निगाहों में कशिश और ज़ुल्फ़ो की निगहबानी
एक ख़ूबसूरत दरिया है, मुझे तेरी तिश्नगी दे-दे
तेरी साफ़-गोई, ये अदब, अदा, सब इश्क़ है
शिद्दत है, वफ़ा भी है, तू बस दीवानगी दे-दे
अच्छा लगता है ओछापन, जब साथ तुम हो
तू इक काम कर, बस थोड़ी सी आवारगी दे-दे
कभी कभी ओढ़ लेता हूँ तुझे लिबास की तरह
आँखों में देख मेरी और अपनी तपिश दे-दे
सुकून मिलता है, तुम सम्भालती हो रिंद को जब
बस फ़ना हो जाए ये अगर एक बार दग़ा दे-दे
आएँगी जाएँगी हवाएँ है, मचल रही है ख़ूब
धड़क उठेगा दिल, गर तू थोड़ी हवा दे-दे
ये उल्फत है, तलाश रही अफ़साना कोई
में सुनाऊँ तुम्हें उम्र भर, बस इजाज़त दे-दे