आँख भर के हँसता हूँ कभी-कभी
आंसू हूँ, पानी या ज़ज़्बात कौन हूँ मैं
हक़दारी की हद्द पार करता हूँ कभी
हाकिम हूँ, खुदा या दोस्त कौन हूँ मैं
लोग चाहते है मुझे मगर कभी-कभी
शराब हूँ, दर्द या इश्क कौन हूँ मैं
सितम ज़माना जी भर कर करता है कभी
अदावत हूँ, नफ़ासत या सियासत कौन हूँ मैं
जलते है कुछ मगर ये चिराग तो नहीं
बहार हूँ, शरार या आग कौन हूँ मैं
निगाहों में वो चमक अब नज़र नहीं आती
शिकस्त हूँ, चोट या ललकार कौन हूँ मैं
कोई तो है मुझमें आकर कहीं खो जाता है
पैमाना हूँ, दीवाना या अफसाना कौन हूँ मैं
जुल्फों के साये में, चाँद हमसफर है
बादल हूँ, हवा या खुशबू कौन हूँ मैं