सूरज ने क्यों बिस्तर बाँध लिया
लगता है अब रात होने वाली है ..
सुना है बहुत हसीं होती उनके दीदार के बाद ,
चलो खुश हुआ जाए रात होने वाली है ..
उसकी शोखियाँ , सादगी , चाल सब पसंद आयी ,
एक बार मुझे भी लगा आज कुछ बात होने वाली है ..
अभी तो आये न थे लगा वो वापस चल दिए ,
मौसम बदलने लगा जैसे कायनात रोने वाली है ...
इंतज़ार से महसूस हुआ जुदाई का सबब ,
आँखों में नमी , शायद बरसात होने वाली है
एहसास है कि वो कितना दूर है मगर नज़र तो आता है,
बस इसी ख्याल से ये भीड़ बारात होने वाली है ..
सहर होने को आयी मगर वो पास न आये ,
सपने बुन लिए थे कि अकेले में बात होने वाली है ...
कभी बादलों की गिरफ्त में है तो कभी सितारों में नज़र बंध,
और मुझे लगा था आज चाँद से मुलाकात होने वाली है .


