हम किसी के ख्याल में रहते है अब
उस ख्याल से तेरी खुशबु आती है
मैं उसके लब पर मचलता हूँ
और चाँदनी उसे नहलाती है
हर अदा है खूबसूरत ग़ज़ल जैसी
मेरी धड़कन उसे गुनगुनाती है
सर्द हवाओं में तिरे इंतज़ार की तपिश
अब उसकी याद उसे और करीब लाती है
मदहोश होते है सर-ए-रह-गुज़र
जब- जब तस्वीर तेरी मुस्कुराती है
शजर से की है शाख ने शिकायत
पत्तियां तेरी याद में कसमसाती है
रास्तों के पत्थर अब आवाज़ नहीं करते
जब मेरे कदमो की आहट आती है
इस शहर में अब नज़र कहाँ आते हो
मेरी नज़र अब तिरे शहर तक जाती है
तारों के झुरमुट में, बादलों के पीछे
चाँदनी छुप- छुप कर आंसू बहती है
किसी और का अफसाना हम क्यों सुने
जब तेरी निगाहें हमारी ग़ज़ल सुनाती है


