वो पूछते है बार बार की हम क्या है, जवाब की तलाश में बहुत दूर आया हूँ ... हर तरफ शोर है , दौड़ है अजीब सी , क्या बताऊ तुम्हे की कहाँ आया हूँ .. अजीब अजीब हसरते है दोस्तों यहाँ , क्या नाम लून में अभी तो आया हूँ .. दिखते है सब चहरे एक से सलोने से , आइना देखा तो लगा में भी इनका साया हूँ , कैसे बात कर सकता हूँ दूसरों के मिज़ाज़ की , खुद में झाँक कर लगता है अभी कहाँ जान पाया हूँ , अंदाज़ जुदा है पूछने का , वो हमसफ़र जो है , जवाब दें भी तो क्या , कुछ समझ न पाया हूँ .. आइना मददगार है सामने रख कर देखता हूँ , अब आइना भी कहता है , रुको एक सवाल लाया हूँ ... बदल गया है ज़माना , सवालो की किताब बन गए सब , जवाब की तलाश में , सवालो के करीब आया हूँ ...