सफ़र-ए-इश्क़ में ऐ दिल कहाँ आराम आता है वफायें तो नहीं मिलती फ़क़त इल्ज़ाम आता है तो जब रिश्तो की चादर में ठिठुरते हैं यूँ रातों को अकेलेपन का कम्बल ही हमारे काम आता है