इशारा तक नहीं मिलता किसी को अचानक मौत आती है सभी को   फलक ने रात भर आँसू बहाए लो ठंडक पड़ आखिर ज़मी को   अभी माँ-बाप का साया है सर पे सो अब न कोसिएगा ज़िन्दगी को   सुकून-ओ-लुत्फ के हकदार सब हैं उठाना बोझ पड़ता है हमी को   ये आंसू साफ़ दिखते हैं तुम्हारे ख़ुदा के वास्ते रोको हंसी को   तलाशे लाश में मज़हब सभी ने कोई पूछेगा कोई अब आदमी को