मुर्दा था कल तक ,
जगत की माया को ना समजकर,
पर आज थोड़ा सुकून से सोचकर,
दुनिया की आंखो में देखा
और वो राह बदल गई।
जहा मशीनों को देखता था,
जहा ज़िंदा मरे हुए इंसानों को देखता था
वहीं आज आसमान में उड़ते परिंदो को
आजादी से उड़ते देखा
और वो राह बदल गई।
सिर्फ जीने की चाह रखी,
खुदको ही बदलने की चाह रखी,
कुदरत को खुदमें धड़कता देखा
और वो राह बदल गई।


