तुम्हारा प्रेम-पत्र (एक प्रेम-रस की कविता) - सौरभ सुमन की कलम से's image
हिंदी कविताPoetry1 min read

तुम्हारा प्रेम-पत्र (एक प्रेम-रस की कविता) - सौरभ सुमन की कलम से

Saurabh SumanSaurabh Suman October 30, 2022
Share0 Bookmarks 57994 Reads0 Likes

अभी रात्रि के कई प्रहर हैं बाकी,

सवेरा को छलता घोर तिमिर की झाँकी।।

निंदिया को अँखियों से परे झटकाए,

नयनपट पर स्मृति की वृतांत सजाए।।

मुस्कान ओंठो पर लाके अति मोहक,

हृदय कुंज में प्रीत भरके अति पावक।।

उँगलियों में तुलिका दबाए लजाती,

मन में शब्दें बुनकर, पलकें झुकाती।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts