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श्री चित्रगुप्त वंदना - कुण्डलिया छंद में लिखी कविता

मनुष्य कर्म के चित्रक, आयुध कलम दवात,

धर्मापति धर्म प्रबंधक, शीतल ज्ञान प्रपात।

शीतल ज्ञान प्रपात, त्रिदेव-गुण, साध समर्थ,

मैं मूढ़ मति अज्ञात, हे कुल श्रेष्ठ कायस्थ,

निर्गुण-सगुण प्रवीण, प्रभुवर ज्ञान केतु भरो,

मैं निज वत्स चित्रांश, मस्तक वरद हस्त धरो।


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