Poetry 1 min read 788.2K reads

इंतिज़ार-ए-सुबह


इंतिज़ार-ए-सुब्ह में चाँद भी जागा तमाम शबसहरा सहर का आज भी सूरज के सर गया

— सफ़र
Read more Earn more Learn more