कुछ और झुग्गियाँ कम हो गयीं हमारे शहर में
कौन कहता है बे-मकाँ हुए वो बेवज़ह
आज फिर हमारे मुल्क ने कुछ तरक़्क़ी की है
ये हुक्मरान बे-मूरव्वत नहीं सौरभ
फ़रमाबरदार हैं, के ये हुकूमत हमने मुंतख़ब की है


कुछ और झुग्गियाँ कम हो गयीं हमारे शहर में
कौन कहता है बे-मकाँ हुए वो बेवज़ह
आज फिर हमारे मुल्क ने कुछ तरक़्क़ी की है
ये हुक्मरान बे-मूरव्वत नहीं सौरभ
फ़रमाबरदार हैं, के ये हुकूमत हमने मुंतख़ब की है