कबीरअरे गाड़ी अटकी रेत में, भई मजल बड़ी है दूरधर्मी धर्मी पार उतरगया, अन पापी चकना चूरजरा धीरे धीरे हको मोरे राम गड़ीवला
कबीर
अरे गाड़ी अटकी रेत में, भई मजल बड़ी है दूरधर्मी धर्मी पार उतरगया, अन पापी चकना चूर
जरा धीरे धीरे हको मोरे राम गड़ीवला