दिल टूट गया,

साजन रूठ गया,

खत्म होगयीं बात,

बित गयी रात.


दिल टूट गया,

साथ छूट गया,

अब रोके क्या फायदा,

जो होना था होगया.


दिल टूट गया,

रास्ते खो गए,

मंज़िले धुंदला गयी,

वास्ते छूट गए.


दिल टूट गया,

गाणे चल गए,

बातोंसे ज्यादा,

बहानें चल गए.


दिल टूट गया,

खाना छूट गया,

एक रातमे पूरा,

ज़माना रूठ गया.


दिल टूट गया,

आंखोंमे नमिसि है,

आज भी लगता है ज़िंदगीमे,

तुम्हारी कमिसि है.


दिल टूट गया,

चलता रहा मै रातभर,

सुलगता रहा चरित्र मंथनमे,

यादोंके सिलसिलोंका सफर.


दिल टूट गया,

अब किसको दोष दूँ,

उसको गाली दूँ,

या खुदको कोस दूँ.


दिल टूट गया,

अच्छा हुआ टूट गया,

टूटे टुकडोंसे मैंने,

महलोंके है झरोखे बनाये.


दिल टूट गया,

सोचता रहा रातभर,

क्या लगी है मेरे खुदा को,

इसकी थोड़ी सी खबर.


दिल टूट गया,

ज़िंदगीमे बोझ सा है,

शायद ये वक़्त,

मेरे खुदा के खोज का है.


-सौमित्र खानोलकर