गाँव की गलियों के मिट्टी में खेलने का,
स्कूल की शैतानियों का,हार नही भुला।
ओ लड़ना-झगरना और फिर शाम को,
मस्तियाँ करना,कभी वो प्यार नही भुला।
दुख के हर चौराहे पर तू साथ खड़ा था,
ऐ दोस्त! तेरी दोस्ती का यार नही भुला।


गाँव की गलियों के मिट्टी में खेलने का,
स्कूल की शैतानियों का,हार नही भुला।
ओ लड़ना-झगरना और फिर शाम को,
मस्तियाँ करना,कभी वो प्यार नही भुला।
दुख के हर चौराहे पर तू साथ खड़ा था,
ऐ दोस्त! तेरी दोस्ती का यार नही भुला।