शहीद के चिताओ से,
कबतक आंखों का आंसू सुखायेंगे।
माँ की ज्युतिया,पत्नी का मंगलसूत्र,
बहन की राखी कबतक लुटाएँगे।।
रोज शहादत मांग रहे सरहदों के हैवान,
कबतक भष्मासुर पर हम रहम बरसायेंगे।
पूछ रहे चिथड़े पड़े,बलिदानों के शव,
कब दुश्मन अपने घर मातम गीत गाएंगे।।


