
जरा ठहर ऐ! जिंदगी,हम भी साथ चलते है।
तेरे साथ ही अपना,लिए मुकाम चलते है।।
बारिस के पानी की तरह यूं ना बहे जा तू,
कोरे पन्नो पर लिखें,कुछ इतिहास चलते है।
जरा ठहर ऐ! जिंदगी,हम भी साथ चलते है।।
क्यूँ इतनी बेताब है,रुक ना कुछ बात करते है।
खुद से खुद की रूसवाई का मुलाकात करते है।।
बहरे-गूंगों की बस्ती में,किसकी कौन सुनता है,
चल कहीं टीले पर चल कर
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