जरा ठहर ऐ! जिंदगी,हम भी साथ चलते है।
तेरे साथ ही अपना,लिए मुकाम चलते है।।
बारिस के पानी की तरह यूं ना बहे जा तू,
कोरे पन्नो पर लिखें,कुछ इतिहास चलते है।
जरा ठहर ऐ! जिंदगी,हम भी साथ चलते है।।
क्यूँ इतनी बेताब है,रुक ना कुछ बात करते है।
खुद से खुद की रूसवाई का मुलाकात करते है।।
बहरे-गूंगों की बस्ती में,किसकी कौन सुनता है,
चल कहीं टीले पर चल कर आग़ाज़ करते है।
जरा ठहर ऐ! जिंदगी,हम भी साथ चलते है।।
बीते हुए लावारिस पलों को भी याद करते है।
रूठे ग्रह-नक्षत्रों से फिर फरियाद करते है।।
कहते है एक दुआ क़बूल होती है हर रोज,
आज हम भी उसे अजमाने का गुस्ताख़ करते है।
जरा ठहर ऐ! जिंदगी,हम भी साथ चलते है।।