चार बाई छः के कमरे में सिमटी है दुनियाँ,

यहाँ जहर ही जहर नही,हवा भी जहर है।

 

बिना मोल चुकाए तो साँसे भी नही मिलती,

ये गरीबो का गांव नही,अमीरों का शहर है।