लग रही होगी झालरे
ऊपर वाले के दरबार मे।
जा रहा है एक अटल,
इंद्रदेव के परिवार में।।
ब्रम्हा,विष्णु और महेश,
खड़े होंगे इंतजार में।
उत्साहित होंगे देवगण,
जैसे होते हो त्योहार में।।
राजनीति को अनाथ कर,
देश हुवा मंझधार में।
हर कोई स्तम्भ है,
है जनता हाहाकार में।