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आज मन फिर उदास है..

अरुणोदय के बीच सांझ है, नाकाम हर प्रयास है। जाने क्यों हतोत्साहित हुँ, आज मन फिर उदास है। सोचता हूँ,कुछ नही सोचूंगा, फिर भी जाने क्यों निराश है। जिज्ञासाएँ टूटती नजर आती, आज मन फिर
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