अरुणोदय के बीच सांझ है, नाकाम हर प्रयास है। जाने क्यों हतोत्साहित हुँ, आज मन फिर उदास है। सोचता हूँ,कुछ नही सोचूंगा, फिर भी जाने क्यों निराश है। जिज्ञासाएँ टूटती नजर आती, आज मन फिर उदास है। दिल मे अजब हलचल है, सुन्न सारा आकाश है। शून्य सा दिन पड़ा है, आज मन फिर उदास है। कल्पना की बाढ़ आ रही, सच्चाई में हरास है। विश्वास खो रहा खुद का, आज मन फिर उदास है।