मैं किसान हूँ

सबकी थाली का चावल, दाल, सब्जी और पिसान हूँ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से परेशान हूँ

नित नेताओं को रंग बदलता देख हैरान हूँ

कैसे होगी बिटिया की शादी ये सोच कर हलकान हूँ

दिन रात प्रकृति की दया पर निर्भर एक निशान हूँ

जीर्णोद्धार की आस में खड़ा जर्जर मकान हूँ

बिखरती जिंदगी को दम भर समेटता पर नही बेईमान हूँ

मैं इस देश का सर्वाधिक दुर्भाग्यशाली इंसान हूँ

हाँ, मैं ही तो किसान हूँ