मैं था, हूँ और रहूँगा विश्वगुरु,
हाँ! मैंने ही करी थी सभ्यता शुरू,
मेरी चेतना में ज्ञान, विज्ञान है असीमित,
दिलों में प्रेम,करुणा और माफी है,
मुझे परिचय की ज़रूरत नहीं,
'भारत' नाम ही काफी है,
आज अपनी और अपने बच्चों की कहानियों को सुनाने का मन है,
क्योंकि ये वो पावन भूमि है जहाँ पर वचन की लाज रखने के लिए बेटा चला जाता वन है...
बहरों को भी सुनाई दे ऐसी आवाज़ करते है,
वक्त बेचैन हो रहा है... चलिए आगाज़ करते है,
मैं वो हूँ जिसका नाम सुनकर दुश्मन काँप जाता है,
क्योंकि मेरे यहाँ का बच्चा तीन पग में ब्रह्माण्ड नाप जाता है,
हम भगवान होकर भी जूठे बेर खाते है,
पत्थर पर केवल नाम लिख दें तो वो भी तैर जाते है,
जब भी कोई रावण सीता को हाथ लगाता है,
मेरा जना पुत्र जाके लंका जलाकर आता है,
जो प्रेमभाव से गले लगे उसे प्रेम से भर देते हैं,
अस्मिता को हाथ लगाने वाले का कुल खत्म कर देते हैं,
सारी उम्मीदें खत्म होने पर मैं ही चिराग रहता हूँ,
बात सबके कल्याण की हो तो गोकुल त्याग देता हूँ,
सबके मन में बस जाने को बाँसुरी मैं ही बजाता था,
और धर्म को बचाने को सुदर्शन भी उठाता था,
मैं ही हूँ वो जो भटके हुए को मार्ग पर लाता हूँ,
एक साड़ी की कीमत 100 भाई के प्राणों से चुकाता हूँ,
मैं वो हूँ जो अमृत सा गीता ज्ञान देता हूँ,
और माँ के श्राप को भी वरदान मान लेता हूँ,
सब कहते हैं... 'की ये भारतीय किस बात पर इतराते है?'
आज चलो इतराने के कुछ नमूने दिखाते हैं,
जब विज्ञान की दुनिया में कालिमा छाई थी,
'जुग सहस्त्र जोजन पर भानु' से सूरज की दूरी हमने ही बताई थी,
जब सारा संसार बैठकर तारों को बस गिनता था,
तब तारों के विज्ञान का ज़िक्र हमारे होठों पर मिलता था,
जिस दौर में वो सारे ठीक से बोल न पाते थे,
तब हम पर्वत चीरकर मंदिर बनाकर आते थे,
मैं शरण में आए हुए को कभी नही ठुकराता हूँ,
क्योंकि 'वसुधैव कुटुंबकम' मैं बचपन से दोहराता हूँ,
मैं वही हूँ जो युद्ध कला माँ के गर्भ से सीखकर आता हूँ,
निराशा के अंधेरे छा जाएं तो सूरज बनकर आता हूँ,
मेरे इतिहास में...
मेरी लाडलो की तलवारे दुश्मन को बीच से चीर आती थी,
और मेरी लाडली तो नवजात बच्चे को लेकर लड़ने जाती थी,
मेरी संतान जब भी युद्ध में हार जाती थी,
हाय मेरी बच्ची!
सूत की लाज बचाने को वो जौहर कर आती थी,
जब ठुकराए हुए को शरण कहीं नही मिली थी,
मेरे बच्चे की दरियादिली तब मिसाल बनी थी,
जिनको घरों से भगाया गया रातों रात था,
उनका सहारा बनने वाला मेरा शेर-ए-गुजरात था,
मेरे लाल अकेले होकर भी पूरी सरकार से लड़ जाते थे,
मानकर महबूब की बाहें, फाँसी पर चढ़ जाते थे,
मेरे जनेउधारी के पास उसका 'बमतुल बुखारा' था,
जिसने सबके सीने चीर-चीर आखिर में खुद को मारा था,
कुछ ज़ालिमों ने मेरी आत्मा को काट दिया था,
अपनी Divide & Rule नीति से मुझे टुकड़ों में बाँट दिया था,
जो गलती कभी की ही नहीं उसके लिए दंडित कर गए,
मेरी अखंड भूमि को जाते जाते खंडित कर गए...
आज...
मुझमे पंजाब सिंध गुजरात मराठा द्रविड़ उत्कल बंगा है,
धरती को चीर अंबर को फाड़, दहाड़ रहा तिरंगा है,
प्रेम करने मे सबसे आगे पर नफ़रत में कच्चा हूँ,
तभी सभी मुझे कहते हैं मैं सारे जहाँ से अच्छा हूँ,
आज मेरे सर का ताज मेरा हिमालय है,
उस ताज के रखवाले मेरे बच्चे जियाले हैं,
यहाँ गंगा, यमुना, गोदावरी मेरी नसों मे दौड़े जाते है,
फिरभी मेरे बच्चे मेरे लिए खून से नहाते हैं,
हम वो हैं जो सवा लाख से एक लड़ाते है,
यहाँ 120 सैनिक 90,000 को घुटनें टेकवाते हैं,
जब सारा संसार विरोध करने पर आ जाता है, तब भी
मेरा बच्चा पोखरन में धमाका करके आता है,
जानना है मेरा औदा किस स्तर पर खड़ा है?
तो देखो...
सागरों की सूची में केवल मेरा ही एक नाम पड़ा है,
जब ज्ञानियों का इस दुनिया में अकाल पड़ जाता है,
हर एक देश आकर मेरा दरवाज़ा खटकाता है,
फिरसे मैं दोहराता हूँ...
मैं था, हूँ और रहूँगा विश्वगुरु,
हाँ! मैंने ही करी थी सभ्यता शुरू,
मेरी चेतना में ज्ञान, विज्ञान है असीमित,
दिलों में प्रेम,करुणा और माफी है,
मुझे परिचय की ज़रूरत नहीं,
'भारत' नाम ही काफी है,
References:
1.सभ्यता(Indus Valley Civilization),
2. तीन पग में ब्रह्माण्ड(वामन अवतार)
3. Para 2,3,4 रामायण
4. Para 5,6 कृष्णा
5.Para 8 पर्वत पे मंदिर(Ellora, Maharashtra)
6.Para 10 रानी लक्ष्मी बाई, जौहर करने वाली रानियाँ (eg रानी पद्मिनी)
7. Para 11 महाराज दिग्विजय सिंहजी जडेजा
8.Para 12 भगत सिंह, बमतुल बुखारा(Gun of Chandrashekhar Azad)
9. Para 16 लोंगेवाला का युद्ध, Pokhran Nuclear Test
10. Para 17 Indian Ocean


