ये गमशुदा, ये गमजदा,

ये गम से लबरेज सी जिंदगी।

ये अनचाही, ये अनबनी,

ये तन्हाइयों में गुरेज सी जिंदगी।।


ये शिकनभरी, ये धधकरही,

बमों के गुलदस्तों सी जिंदगी।

ये आहों की बिन पनाहों की

बिना लक्ष्य के रस्तों सी जिंदगी।।


ये बुराइयां, ये घुड़कियाँ,

कड़वी दवाइयों सी जिंदगी।

ये डुबकियां, ये धमकियां,

सहमी सिसकियों सी जिंदगी।।


ये हमनशीं, ये दिलनशीं,

मिट चुके राहतों सी जिंदगी।

क्या-क्या कहें कबतक कहें,

मरी चाहतों सी जिंदगी।।

@SatyaSurendraM