बाबू जी
सबसे नाता, नेह सभी से, दर्द की सभी दवाई बाबू।
दुःख की बूढ़ी तमस रात्रि मे, सूरज सी तरुणाई बाबू।।
सबकी रोज नई माँगों पर अक्सर मीठी झिड़की देते।
किन्तु सभी के काले घर को वे रोशनी की खिड़की देते।।
हों निराश थक हार सभी तो करते थे अगुवाई बाबू।
सबसे नाता, नेह सभी से, दर्द………………………………….
गाँव में उनके चाल-चलन सा कोई दूजा मनुज नहीं था।
राम बने वो भरसक लेकिन लक्ष्मण जैसा अनुज नहीं था।।
रिश्तों का अद्भुत निर्वाहन नियमों के अनुयाई बाबू।
सबसे नाता, नेह सभी से, दर्द………………………………….
कोई भी हो कार्य कठिन संयम से हल बतलाते थे।
कोई विपदा हो जनमानस उनके पास ही आते थे।।
बुझे हुए आशा दीपक के अमर तेल की राई बाबू।
सबसे नाता, नेह सभी से, दर्द………………………………….
सब डरते थे बात भी कोई सामने हो न करते थे।
फिरभी उनकी खाली जेब से सबके सपने भरते थे।।
कोई भूँखा न सो जाए करते बहुत खिंचाई बाबू।
सबसे नाता, नेह सभी से, दर्द………………………………….
सब कहते थे प्यार वो ज्यादा भैया से ही करते थे।
किन्तु कभी त्योहार कोई वो हम बिन कभी न करते थे।।
उन बिन सब त्योहार हैं फीके चली गयी रौनाई बाबू।
सबसे नाता, नेह सभी से, दर्द………………………………………
ff/Insta/twitter- @SatyaSurendraM
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