आरक्षण 

माना आरक्षण रक्षक है जनहित की परिपाटी का।

माना आरक्षण भक्षक है ऊंच नीच की घाटी का।।

माना आरक्षण से हमने अवसर पैदा कर डाले।

और वंचितों के हित में बस निर्णय सारे कर डाले।।

माना आरक्षण ही केवल बस जातिवाद का भक्षक है।

  जिसमें आधार ही जति हो वो जातिवाद का रक्षक है।।

जिस आरक्षण की मधुशाला से तुम असमानता हटा रहे।

इन्हीं विषाक्त घुट्टियों में इक नई विषमता चटा रहे।।

संविधान ने जिसे राजनैतिक उत्थान बताया था।

    राजनीति ने वोट-बेल को ही उन्मान बनाया था।।

उन्हीं अमरबेलों में वो अब विषधर बनकर बैठे हैं।

और स्वयं की सत्ता और जाति के मद पर ऐंठे हैं।।

लेकिन उनकी इस राजनीति से देखो प्रतिभा मरती है।

और देश के प्रगतिशीलता की हर आभा डरती है।।

हर विवाद को छुवाछूत को जातिवाद को बंद करो।

सच्ची प्रतिभा वालों को बस अवसर दे आनन्द करो।।

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