थोड़ा बहुत तो दिल में तुम मलाल रखना, जिसका भी रखना जरा कम ख्याल रखना, जवाब की उम्मीद जरूर रखो दुनिया से, अपने वास्ते भी लेकिन कुछ सवाल रखना, बुजुर्ग होने का फर्ज अदा करो लेकिन, नन्हें हाथों में भी छोटी मशाल रखना, उम्र भर सुकूँ से बेहतर मर जाना है, जिंदा हो तो ज़िन्दगी में कुछ बवाल रखना, बेऐब ढूढोगे यहाँ तो तन्हा रह जाओगे, कुछ गुनाह सबके लिए हलाल(1) रखना, कहते हैं नाम का असर पड़ता है इंसान पे, मां अगली बार तू मेरा नाम जलाल(2) रखना, कोई मुस्कुराता हुआ दिखे तो दुआ मांग लो, खुदा हमारी भी ज़िंदगी में कभी ये कमाल रखना।। #सात्विक 1: स्वीकार्य 2: अकबर