देर हुई ....अब तक ना आयी

जाड़ों की बातें रही सुनी सुनायी

सर्द हवाओं कि दिशा 

भटक गयी शायद 

ना भँवरों से मिली ख़बर

ना बाग़ों ने भरी अंगड़ाई

झरोखों में पर्दे डाल जनवरी में

भला धूप से लड़ता है कोई

पंखों की लोरियाँ सुन 

रात में तन्हा सोता है कोई

रंग थे जिस मौसम के वो

गुलदाउदी की कलियाँ मुरझा गयी

देर हुई ....अब तक ना आयी

जाड़ों की बातें रही सुनी सुनायी

।।।सतीष